Vakilpedia ब्लॉग · अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
क्या भारत में ई-सिग्नेचर क़ानूनी रूप से वैध है? WhatsApp पर PDF साइन करना
हाँ — भारतीय क़ानून इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर को मान्यता देता है, और ज़्यादातर रोज़मर्रा के एग्रीमेंट इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन किए जा सकते हैं। लेकिन हर ई-सिग्नेचर का क़ानूनी वज़न एक जैसा नहीं होता, और कुछ दस्तावेज़ों पर आज भी स्याही का हस्ताक्षर चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत व्यावहारिक स्थिति यह है।
क़ानून क्या कहता है
- IT Act की धारा 5: जहाँ किसी क़ानून में हस्ताक्षर ज़रूरी है, वहाँ निर्धारित तरीक़े से किया गया इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर उस ज़रूरत को पूरा करता है।
- IT Act की धारा 3A: किसी रिकॉर्ड को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर या प्रमाणीकरण तकनीक से प्रमाणित किया जा सकता है जो भरोसेमंद हो और दूसरी अनुसूची (Second Schedule) में बताई गई हो। आधार-आधारित eSign और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफ़िकेट वहाँ बताए गए हैं।
- IT Act की धारा 10A: कोई कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ़ इसलिए अप्रवर्तनीय नहीं होता कि वह इलेक्ट्रॉनिक रूप से बना है।
- IT Act की धारा 1(4) और पहली अनुसूची (First Schedule): यह अधिनियम कुछ दस्तावेज़ों पर लागू नहीं होता — वसीयत और ट्रस्ट, और (कुछ विनियमित ऋणदाताओं के लिए 2022 की छूट के साथ) चेक के अलावा परक्राम्य लिखत, पावर ऑफ़ अटॉर्नी, और अचल संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण के कॉन्ट्रैक्ट।
ई-सिग्नेचर के दो प्रकार
| आधार eSign / DSC | साधारण ई-सिग्नेचर (क्लिक, टाइप या हाथ से बनाया) | |
|---|---|---|
| IT Act की दूसरी अनुसूची में बताया गया | हाँ | नहीं |
| किसके लिए ठीक है | फ़ाइलिंग और ऐसे दस्तावेज़ जिनमें क़ानून हस्ताक्षर माँगता है | एंगेजमेंट लेटर, सहमति पत्र, NDA, वेंडर और क्लाइंट एग्रीमेंट |
| कैसे साबित होता है | सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर के लिए वैधानिक उपधारणाएँ | किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की तरह — ऑडिट ट्रेल, हैश और BSA की धारा 63 का प्रमाणपत्र |
साधारण ई-सिग्नेचर को मज़बूत क्या बनाता है
- किसने साइन किया इसका सबूत: वह फ़ोन नंबर या ईमेल जिस पर लिंक भेजा गया, और लिंक कब खोला गया।
- दस्तावेज़ बदला नहीं इसका सबूत: अंतिम PDF का हैश।
- कब साइन हुआ इसका सबूत: ऐसा टाइमस्टैंप जिसे आप स्वतंत्र रूप से जाँच सकें।
- एक ऑडिट ट्रेल जिसे आप प्रिंट कर सकें और हस्ताक्षर पर विवाद होने पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63 के तहत प्रमाणित कर सकें।
WhatsApp पर PDF साइन करवाना
SignLinx आपका PDF WhatsApp पर साइनिंग लिंक के रूप में, या शेयर किए जा सकने वाले लिंक के रूप में भेजता है। साइन करने वालों को अकाउंट बनाने की ज़रूरत नहीं। हर साइन किया हुआ दस्तावेज़ एक सर्टिफ़िकेट, पूरे ऑडिट ट्रेल और Bitcoin ब्लॉकचेन पर टाइमस्टैंप किए गए SHA-256 फ़िंगरप्रिंट के साथ वापस आता है — यानी वही सबूत जो हस्ताक्षर पर कभी सवाल उठे तो कोर्ट माँगेगा। रोज़ एक दस्तावेज़ मुफ़्त है।
इसे कोर्ट में साबित करने के पहलू के लिए देखें धारा 63 BSA प्रमाणपत्र।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत में PDF पर किया गया हस्ताक्षर वैध है?
कॉन्ट्रैक्ट और सहमति पत्रों के लिए आमतौर पर हाँ (IT Act की धारा 5 और 10A)। IT Act की पहली अनुसूची के दस्तावेज़, जैसे वसीयत, इससे बाहर हैं और उन पर भौतिक हस्ताक्षर चाहिए।
eSign और डिजिटल सिग्नेचर में क्या फ़र्क है?
दोनों IT Act की दूसरी अनुसूची में हैं। डिजिटल सिग्नेचर टोकन पर रखे सर्टिफ़िकेट (DSC) से होता है; आधार eSign OTP से प्रमाणीकरण के बाद एक बार का सिग्नेचर बनाता है। साधारण ई-सिग्नेचर (हाथ से बनाया या टाइप किया) अनुसूची में नहीं है, लेकिन फिर भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में साबित किया जा सकता है।
क्या भारत में वसीयत इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन की जा सकती है?
नहीं। वसीयत IT Act की पहली अनुसूची में है, इसलिए यह अधिनियम उन पर लागू नहीं होता।
यह लेख क़ानून को सामान्य रूप से समझाता है; किसी ख़ास केस के लिए यह क़ानूनी सलाह नहीं है। सेक्शन नंबर और पाठ बेयर एक्ट से लिए गए हैं; फ़ाइल करने से पहले मौजूदा पाठ ज़रूर जाँच लीजिए।
इसके लिए टूल
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EvidenceHash
फ़ाइल का SHA-256 हैश अपने ब्राउज़र में ही बनाइए और कोर्ट के लिए तैयार धारा 63 BSA सर्टिफ़िकेट (PDF) डाउनलोड कीजिए।
सबूत का हैश बनाइए →Vakilpedia टूल
Affidavit Maker
चैट में कुछ सवालों के जवाब दीजिए और वेरिफ़िकेशन व डिपोनेंट ब्लॉक के साथ फ़ाइल करने लायक एफ़िडेविट PDF पाइए — हिंदी या अंग्रेज़ी में। रोज़ एक फ़्री।
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