Vakilpedia ब्लॉग · अपडेट: 4 अक्टूबर 2026

भारत में डिजिटल अरेस्ट स्कैम: यह कैसे होता है, केस स्टडी और तुरंत क्या करें (BNS गाइड)

“डिजिटल अरेस्ट” स्कैम में ठग पुलिस/CBI/ED अधिकारी बनकर आपको डराते हैं कि आप किसी अपराध में शामिल हैं। फिर वे मामला “निपटाने” के लिए तुरंत पैसे मांगते हैं। भारत में कोई भी पुलिस अथॉरिटी फ़ोन/वीडियो पर गिरफ़्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है।

“डिजिटल अरेस्ट” स्कैम क्या है?

ठग पुलिस/CBI/ED बनकर दावा करते हैं कि आप किसी आपराधिक केस से जुड़े हैं (अक्सर आधार/फ़ोन नंबर को “बहाना” बनाते हैं)।

वे आपको सबसे अलग-थलग कर देते हैं, गिरफ़्तारी की धमकी देते हैं और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव डालते हैं।

असली केस स्टडी (एक वास्तविक घटना पर आधारित)

एक नौकरीपेशा महिला को किसी केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बनकर एक व्यक्ति का फ़ोन आया।

फ़ोन करने वाले ने कहा कि उसका आधार किसी अपराध से जुड़ा है और FIR दर्ज हो चुकी है।

उसे “वेरिफिकेशन” के नाम पर वीडियो कॉल पर बैठने को मजबूर किया गया और तुरंत गिरफ़्तारी की धमकी दी गई।

डर और जल्दबाज़ी में उसने पैसे ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसे पता चला कि यह फ्रॉड था।

स्कैम कैसे काम करता है (कदम-दर-कदम)

  1. पहला कॉल: नकली अथॉरिटी (पुलिस/CBI/ED)।
  2. पहचान का झटका: “आप किसी अपराध / मनी लॉन्ड्रिंग / ड्रग्स / आधार के दुरुपयोग से जुड़े हैं।”
  3. अलग-थलग करना: “किसी को मत बताइए; आपका फ़ोन निगरानी में है।”
  4. डराना-धमकाना: वीडियो कॉल पर गिरफ़्तारी/जेल की धमकी।
  5. जल्दबाज़ी: केस “बंद” या “वेरिफाई” करने के लिए तुरंत पैसे की मांग।

कानूनी स्थिति (नए कानून पर फ़ोकस)

आम तौर पर लागू होने वाले प्रावधान (मोटे तौर पर):

  • BNS 2023: धारा 318(4) — धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करना (पहले IPC 420)
  • BNS 2023: धारा 319(2) — नाम/पहचान बदलकर धोखाधड़ी (पहले IPC 419)
  • IT Act 2000: धारा 66D — कंप्यूटर संसाधनों के ज़रिए नाम/पहचान बदलकर धोखाधड़ी
  • IT Act 2000: धारा 66C — पहचान की चोरी (identity theft)

तुरंत क्या करें (बेहद ज़रूरी)

  1. कॉल काट दें और हर तरह की बातचीत बंद कर दें।
  2. ट्रांज़ैक्शन जल्दी ब्लॉक करवाने की कोशिश के लिए साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
  3. तुरंत अपने बैंक को बताएं और ट्रांज़ैक्शन फ्रीज़/रिवर्सल की मांग करें (ट्रांज़ैक्शन ID/UTR साझा करें)।
  4. सबूत सुरक्षित रखें: कॉल रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट, चैट लॉग, बैंक SMS, ट्रांज़ैक्शन ID, फ़ोन नंबर।
  5. आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें और एकनॉलेजमेंट नंबर सेव कर लें।

ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें (आधिकारिक पोर्टल)

आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल का इस्तेमाल करें:

https://cybercrime.gov.in/Webform/Accept.aspx

आपात स्थिति में स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। राष्ट्रीय पुलिस हेल्पलाइन: 112 • राष्ट्रीय महिला हेल्पलाइन: 181 • साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 1930

कानूनी उपाय

  • BNS और लागू IT Act की धाराओं के तहत FIR/शिकायत दर्ज करें
  • बैंक और जांच के तालमेल से पैसा वापस पाने की कोशिश करें
  • देरी हो तो सही माध्यमों से मामला आगे बढ़ाएं (एस्केलेट करें)
  • ज़रूरत हो तो निर्देश या राहत के लिए कोर्ट जाएं

खुद को कैसे बचाएं

  • पुलिस कॉल/वीडियो पर कभी पैसे नहीं मांगती।
  • OTP, PIN या स्क्रीन-शेयर का एक्सेस कभी किसी को न दें।
  • आधिकारिक माध्यमों से खुद अलग से पहचान की पुष्टि करें।
  • धमकियों से घबराएं नहीं; जल्दबाज़ी मचाना हेरफेर की एक चाल है।

उपयोगी टूल

IPC ↔ BNS कन्वर्टर (Vakilpedia) का इस्तेमाल करें:

vakilpedia.com/ipc-to-bns-converter

डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के लिए EvidenceHash का इस्तेमाल करें:

vakilpedia.com/evidence-hash-sha256

BareLex पर कोई भी बेयर एक्ट फ़्री पढ़िए:

vakilpedia.com/barelex

क़ानूनी मदद चाहिए?

अगर आप या आपके क्लाइंट डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार हुए हैं, तो समय बहुत कीमती है। साइबर फ्रॉड के केस, FIR ड्राफ्टिंग और रिकवरी की कार्यवाही के लिए आप किसी योग्य वकील से सलाह ले सकते हैं:

/hi/contact

निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट कोई कानून नहीं है, यह फ्रॉड है।

जल्दी कदम उठाएं, सबूत सुरक्षित रखें और आधिकारिक साइबर क्राइम प्रक्रिया से हालात अपने हाथ में लें।

यह लेख क़ानून को सामान्य रूप से समझाता है; किसी ख़ास केस के लिए यह क़ानूनी सलाह नहीं है। सेक्शन नंबर और पाठ बेयर एक्ट से लिए गए हैं; फ़ाइल करने से पहले मौजूदा पाठ ज़रूर जाँच लीजिए।