Vakilpedia ब्लॉग · अपडेट: 4 अक्टूबर 2026

चीटिंग की BNS धारा: IPC 420 अब BNS 318(4) है

IPC 420 अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) है। साधारण चीटिंग (पुरानी IPC 417) BNS 318(2) है, और बहरूपिया बनकर चीटिंग (पुरानी IPC 419) BNS 319(2) है। ध्यान दें: BNS 316 आपराधिक न्यास-भंग (criminal breach of trust) है, चीटिंग नहीं — FIR और ड्राफ़्ट में यह आम गलती है।

चीटिंग: पुरानी IPC से नई BNS तक

पुरानी IPCनई BNSअपराधसज़ासंज्ञेयज़मानती
415318(1)चीटिंग की परिभाषा———
417318(2)चीटिंगअधिकतम 3 साल, या जुर्माना, या दोनोंअसंज्ञेयज़मानती
418318(3)ऐसे व्यक्ति से चीटिंग जिसके हित की रक्षा करने के लिए अपराधी बंधा थाअधिकतम 5 साल, या जुर्माना, या दोनोंअसंज्ञेयज़मानती
420318(4)चीटिंग और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करनाअधिकतम 7 साल और जुर्मानासंज्ञेयग़ैर-ज़मानती
416 / 419319बहरूपिया बनकर चीटिंग319(2): अधिकतम 5 साल, या जुर्माना, या दोनोंसंज्ञेयज़मानती

वर्गीकरण BNSS, 2023 की पहली अनुसूची (First Schedule) से है। सज़ा BNS की धाराओं के शब्दों के अनुसार दी गई है।

IPC 420 से क्या बदला

मूल तत्व वही हैं: धोखा, बेईमानी से प्रेरित करना और संपत्ति सौंपना (या किसी मूल्यवान प्रतिभूति — valuable security — को बनाना, बदलना या नष्ट करना)। अधिकतम सज़ा सात साल और जुर्माना ही है, और अपराध अब भी संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती है। बदला सिर्फ़ नंबर है — और जो ड्राफ़्ट, FIR और ज़मानत अर्ज़ियाँ 1 July 2024 के बाद हुए अपराध के लिए अब भी “420” लिखती हैं, उन्हें BNS 318(4) लिखना चाहिए।

पुराना अपराध या नया?

कौन सी संहिता लगेगी, यह अपराध की तारीख़ तय करती है। 1 July 2024 से पहले हुआ अपराध अब भी IPC के तहत चलता है; उस तारीख़ को या उसके बाद हुआ अपराध BNS के तहत चलता है। उस तारीख़ के बाद शुरू हुई कार्यवाहियों में प्रक्रिया (जाँच, ज़मानत, ट्रायल) BNSS के अनुसार चलती है, BNSS की बचाव-धारा (savings clause) के अधीन।

FIR की बाकी धाराएँ भी बदलें

चीटिंग शायद ही अकेली आती है — 406 (अब 316(2)), 467/468/471 (अब 338, 336(3), 340(2)) और 120B (अब 61(2)) आम तौर पर उसके साथ लगती हैं। किसी भी धारा के लिए IPC to BNS converter इस्तेमाल करें, या सज़ा और ज़मानत की स्थिति के साथ BNS की पूरी धारा-सूची देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

IPC 420 की BNS में कौन सी धारा है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) — चीटिंग और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करना। देखें BNS 318।

क्या BNS 318(4) ज़मानती है?

नहीं। BNSS की पहली अनुसूची के अनुसार यह संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती है, और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। 318(2) के तहत साधारण चीटिंग ज़मानती है।

क्या BNS 316 चीटिंग है?

नहीं। BNS 316 आपराधिक न्यास-भंग (criminal breach of trust) है (पुरानी IPC 405–409)। चीटिंग BNS 318 है।

यह लेख क़ानून को सामान्य रूप से समझाता है; किसी ख़ास केस के लिए यह क़ानूनी सलाह नहीं है। सेक्शन नंबर और पाठ बेयर एक्ट से लिए गए हैं; फ़ाइल करने से पहले मौजूदा पाठ ज़रूर जाँच लीजिए।